Deoghar: अनावश्यक घर से बाहर ना निकले, विशेषकर बच्चें एवं वृद्व।
● पर्याप्त गर्म कपड़े पहने, टोपी एवं मफलर का प्रयोग करें। मौसमी बदलाव पर
संचार माध्यमों के जरीये नजर रखें।
● अकेले वृद्व लोगो की सहायता करें।
● घर पर अतिआवश्यक वस्तुओं का भंडार रखें।
● पौष्टिक भोजन एवं गर्म पेय पदार्थ का नियमित अंतराल पर सेवन करें।
● शराब एवं तम्बाकू का उपयोग ना करेेें।
● बंद कमरों में लालटेन, दीया एवं जलती अंगीठी का प्रयोग ना करें।
● उच्च रक्तचाप/मधुमेह/हृदय रोगी अपने स्वास्थ्य का विषेष ध्यान रखें एवं धूप निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें।
● किसी भी प्रकार के असमान्य लक्षण के अभास होने पर चिकित्सीय परामर्ष अवष्य ले एवं नजदीकीय स्वास्थ्य केन्द्रों पर सम्पर्क करें। जैसे-अनियंत्रित कंपन, थकावट, स्खलित उच्चारण, दस्त एवं सीने में दर्द की षिकायत इत्यादि होने पर यथाशीघ्र चिकित्सीय सहायता लें।
● शीतलहर के दौरान घर के अन्दर सुरक्षित रहें।
● स्थानीय रेडियो प्रसारण केन्द्र एवं विभिन्न समाचार पत्रों के माध्यम से मौसम की जानकारी लेते रहें।
● शरीर में उष्मा के प्रवाह को बनाये रखने के लिये पोषक आहार एवं गर्म पदार्थों का सेवन करें।
● शरीर पर कई स्तरों वाले ऊनी एवं गर्म कपड़ों को पहने।
● कमरों में कैरोसीन, हीटर या कोयले की अंगीठी का प्रयोग करते हुए धुएँ के निकास का उचित प्रबंध करना सुनिश्चित करें।
● विषम परिस्थितियों में अथवा अत्यधिक सर्दियों के लिये ईंधन बचा कर रखें।
● यदि आपके पास अलाव इत्यादि न हो तो नजदीकी जन-आश्रय केन्द्र में जाएँ जहाँ अलाव की व्यवस्था हो।
● अपने सिर को ठिक प्रकार से ढक कर रखें क्योंकि की सिर के माध्यम से शरीर की उष्मा पूरी हो सकता है। अपने मुँह को ढक कर रखें इससे आपके फेफड़ों को ठण्ड से सुरक्षा मिलेगी।
● क्षमता से ज्यदा कार्य नहीं करें, इससे हृदयाघात का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
● शीतदंश के लक्षणों पर नजर रखें, जैसे शरीर के अंगों का सुन्न पड़ना हाथों-पैरों की उंगलियों, कान, नाक, आँख सफेद या पीले रंग के दाग उभर आना इत्यादि।
● हाइपोथर्मियां के लक्षणों पर नजर रखें जैसे याद्दाष्त का कमजोर पड़ना, असीमित ठिठुरना, सुस्ती-थकान तथा कार्य में भटकाव इत्यादि।
